एड्सन अरान्तेस डो नैसिमेंटो, जिन्हें पूरा जगत पीले के नाम से जानता था, ने बुधवार को अपनी लंबी बीमारियों की लड़ाई हार दी है। दक्षिण अमेरिकी देश के इस दिग्गज खिलाड़ी का निधन अल्बर्ट आईन्स्टाइन अस्पताल में हुआ, जहाँ वे इलाज के लिए भर्ती थे। उनकी मौत के समाचार सुनकर पूरे विश्व ने रात भर की रोशनी में भी मोमबत्ती जलाई। यह संयोग नहीं कि ब्राजील ने तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया।
क्या सोचा था कि एक इंसानी शरीर इतने बड़े खेल का प्रतिनिधित्व कर सकता है? पेले तो सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, वे एक संकेत (symbol) थे। 1940 में उत्तरपूर्वी ब्राजील में पैदा हुए ये बच्चे, जिन्हें गरीबी और आशा का सामना करना पड़ा, आज दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर खड़े हैं। 2022 का वह साल जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तब तक उन्हें कई दर्जनों वर्षों से कैंसर से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जंग लड़ना पड़ रहा था।
एक ऐसे राजा का असली चेहरा
यदि आप उनके कारनामों की बात करें, तो पहले तो एक ही बात बताती है: उन्होंने 17 साल की उम्र में पहली बार विश्व कप जीता था। 1958 वर्ल्ड कप फाइनल, स्विडन में, जब ब्राजील के पास कोई भी नहीं था, तब पेले मैदान में गए और दो गोल किए। फिर उसी साल दूसरा गोल, फिर तीसरा... यह उनका रिकॉर्ड बना। 1958 के फाइनल में होस्ट टीम स्वीडन को हराने वाले वे युवा खिलाड़ी थे।
कुछ लोग कहते हैं कि वे कभी अपने आप पर अधिक बोझ डालते थे, लेकिन पेले का मानना था कि गेंद उनके हाथों में थी। FIFA की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने कुल 1,281 गोल किए। यह संख्या किसी आम आंकड़े की तरह नहीं है; यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जिसके बारे में चर्चा होती रही है। स्वेटिश टीमों जैसे Cristiano Ronaldo ने भी इसे टक्कर दी है, लेकिन पेले का रिकॉर्ड अब भी एक महत्वपूर्ण स्थिति में रहता है।
सांटोस एफसी और उसकी वफादारी
पेले का जीवन सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मैचों तक सीमित नहीं था। ब्राजील के क्लब Santos FC की बात करने पर ही उनकी असली कहानी निकलती है। उन्होंने लगभग पूरा अपना करियर वहीँ बिताया। हालांकि बाद में New York Cosmos में भी उन्होंने समय बिताया, लेकिन दिल सांटोस में बैठा रहता था। 1959 में उन्होंने एक कैलेंडर में 127 गोल किए थे—एक रिकॉर्ड जो शायद कभी नहीं टूट पाएगा।
उन्होंने सांटोस के लिए 643 गोल किए। इन मैचों में उनकी ताकत देखकर पूरा विश्व हैरान रह जाता था। वे कभी अपने स्टैडियम में नहीं गिरते थे। 1962 और 1963 में कॉपा लिबर्टाडोर्स जीतना भी उनके लिए बहुत स्वाभाविक था। वे ब्राजील के राष्ट्रपति भी बने रहे थे, लेकिन कभी राजनीति की बात करते थे या अपने खेल से ही बातें बांधते थे।
राष्ट्रीय शोक और अंतिम विदाई
जैसे ही समाचार फैला, संतोस के व्यस्त सड़कों पर भी चुप्पी छा गई। उनके शव को शहर के मुख्य क्षेत्रों से गुजारते हुए लाया गया। 100 साल की उनकी माँ सेलिस्ट के घर के सामने भी कोफिन रुका था, लेकिन माँ को वे हालत में बेहोश थीं।
सैंतोस फ़ुटबॉल मैदान (Vila Belmiro Stadium) में लाखों लोगों ने उन्हें अंतिम अलविदा दिया। पुकार के बीच, मंगलवार सुबह दफनाने की अनुमति दी गई थी। परिवार वालों के छोटे समूह के साथ, Mémorial Necrópole Ecumênica में उनकी दफनाई हुई। यह एक ऊँची कबर है, जहाँ उनकी आरामदायक मुद्रा में आखिरी शांति मिली होगी।
क्यों थे वे खास?
खिलंदी की दुनिया में कई नाम आए हैं और जा चुके हैं, लेकिन पेले की बात कुछ और थी। 2022 में उन्होंने ब्राजील के लिए 77 गोल किए थे, जिन्होंने नीमर के साथ इस रिकॉर्ड को साझा किया था। उनके साथ खड़ी एक रेखा यह रही कि उन्होंने 12 फ्री-हैटट्रिक दिए थे। 1970 की क्यूबा में हुई दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम में भी वे शामिल थे। यह वह समय था जब ब्राजील की जीत हुई थी, और वह 1958 की तरह ही था।
प्रशंसकों का कहना है, "इतिहास खत्म हो गया है।" वे प्रत्येक जनजाति के लिए, चाहे वह कौन भी हो, एक प्रेरणा बन गए थे। ब्राजील सरकार ने उन्हें तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया, जो किसी व्यक्ति के लिए दुर्लभ सम्मान है। उनकी मौत के बाद बने हुए ट्रिब्यूटों ने दिखाया कि कैसे खेल एक भाषा बन जाता है जो सबको जोड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पेले की मृत्यु का कारण क्या था?
पेले का निधन 29 दिसंबर 2022 को मध्यस्थ कैंसर के बाद हुआ था। वे कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसने आगे बढ़ते हुए उन्हें अल्बर्ट आईन्स्टाइन अस्पताल में ले गया, जहाँ उन्होंने 82 साल की उम्र में प्राण त्यागे।
उनकी अंतिम विदाई कहाँ आयोजित हुई?
उनकी अंतिम विदाई उनके मातृ शहर सांटोस में Vila Belmiro स्टेडियम में हुई, जहाँ उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ दिनों को बिताया था। परिवार सहित अंतिम संस्कार मेमोरियल नेक्रोपोलि एक्युमैना में किया गया।
पेले ने कुल कितने गोल किए?
वेक्टर और FIFA के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने अपने करियर में कुल 1,281 गोल किए हैं, जो कि 1,363 मैचों में शामिल थे। यह एक ऐसी संख्या है जिसने पिछले दशकों में भी ध्यान खींचा है।
क्या ब्राजील सरकार ने उन्हें सम्मान दिया?
हाँ, उनकी मृत्यु के तुरंत बाद ब्राजील सरकार ने देश के लिए तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। यह उनके योगदान के प्रति राज्य का एक बड़ा समर्थन और श्रद्धांजलि थी।
Firoz Shaikh
पीले का जन्म एक ऐसी गरीबी में हुआ था जो आज भी हमें याद दिलाती है कि संघर्ष कितना महत्वपूर्ण होता है। उनके व्यक्तित्व में जो चमक थी वो सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं थी बल्कि समाज के हर तह में फैली हुई थी। इतिहास के पन्नों में उनका नाम स्थायी रूप से अंकित हो चुका है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने अपनी जीवन भर के प्रयास से यह साबित किया कि प्रतिभा किसी रंग या भाषा की बाध्यता से मुक्त होती है। भारतीय क्रिकेट से जुड़े लोग भी फुटबॉल की इस बेजोड़ आत्मा को गहराई से समझ सकते हैं। उनके गोलों की गिनती अब किसी मायने नहीं रखती क्योंकि असली जीत दिल की जीत होती है। असली मगर यह है कि हम उन्हें कैसे याद कर रहे हैं और क्या विरासत बनाए रख रहे हैं। दुनिया के हर कोने में उनकी छवि आज भी झिलमिला रही है जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। सांटोस क्लब के लिए उन्होंने क्या महत्वपूर्ण था यह समझना आज की युवा वर्ग के लिए जरूरी है। उनकी कड़ी मेहनत ने लाखों गरीब बच्चों के ख्वाबों को सजा दिया है। ऐसे दिग्गजों का निधन हमेशा एक भारी खालीपन और सुनाहटा छोड़ जाता है। लेकिन उनकी दी गई ऊर्जा और उम्मीद हमेशा के लिए उनके परिवार में और देशवासियों के मन में रह जाएगी। हमें उनकी जीवन परिचर्चा से अनिवार्य रूप से सबक लेना चाहिए। खेल का सौंदर्य वही दिखाया था जिसे कोई अन्य खिलाड़ी आज तक नहीं दिखा सका है। श्रद्धांजलि अदा करने का यह सबसे उपयुक्त समय है जब हम चुप्पी से उनके सम्मान में खड़े होते हैं।
ankur Rawat
मेरे मानना है की लोगो ने उसकी ताकत को समझा ही नही है। मैं यहाँ आकर बस यही कहना चाह रहा था कि इतिहास लिखने वाले हमे नहीं भूलते। पेले तो हमेशा ब्रेड का टुकड़ा बन गया जो सबको खाई देता था। उम्मेद है कि अगला कोई ऐसा पैदा हो जिसे देखकर हम रोएंगे।
Mona Elhoby
बहुत सारे नाटक और कम वास्तविक प्रेम।
Yogananda C G
!!! हाँ आप बिल्कुल सही कह रहे हैं !!!!!! यह दुनिया अब शांत नहीं रह सकती!!!!!! कुछ लोग सोचते हैं यह सिर्फ एक गेम था!!!!! लेकिन असलियत में यह एक धर्म था!! आपके जैसे मत बहुत जरूरी हैं!!!!!!
Arjun Kumar
अक्सर लोग इसे मिथक में बदल देते हैं जबकि हकीकत में वे एक आम इंसान थे। मेरे अनुसार रेकर्ड्स अब प्रासंगिक नहीं हैं। आज के डिजिटल युग में उनकी तुलना मुश्किल है। फिर भी उनका प्रभाव कहीं ना कहीं मौजूद है।
RAJA SONAR
वे आम इंसान नहीं थे सामान्य लोगों के पास उनकी परछाई नहीं थी मैंने उन्हें कई बार देखा है। आप लोग क्या जानते हो असली खेल से
Mukesh Kumar
चलो उम्मीद करते हैं कि उनका नाम हमेशा ज़िंदा रहेगा। ये बहुत बुरा समाचार है पर हमें खुश रहना होगा। आइए उनके बारे में अच्छी बातें सोचें।
Shraddhaa Dwivedi
मुझे लगता है यह सही बात है। हमें शांति में याद करना चाहिए।
Divyanshu Kumar
उन्होंने साबित कीया कि ब्राजिलीयन सांस्कृतिकता विश्व की है। हमारे भारत में भी ऐसे लोग हैं पर वो नहीं मिलते। समाज के ढर्रे बदले हुए हैं। अब हमें भी थोडा सा बदलाव करना पडेगा। उनकी सेवाएँ सर्वहारा वर्ग के लिए थी।
Govind Vishwakarma
पर्याप्त डेटा नहीं दिया गया है। लोग अफवाहें फैला रहे हैं। असली स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हुई। सरकार की प्रतिक्रिया धीमी थी।
Jamal Baksh
यह एक ऐतिहासिक क्षण था जिसे हम सहेजकर रखेंगे। उनकी उपलब्धियां अद्भुत थीं। हमारी ओर से उन्हें ढेर सारा सम्मान। संस्कृति और खेल का संगम यहीं था।
Shankar Kathir
आंकड़ों की बात करें तो 1281 गोल का आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ज्यादा है। हालांकि कुछ सांख्यिकी विशेषज्ञ इसे संदेह से देखते हैं लेकिन FIFA ने इसे मान्यता दी है। उनके 1958 के वर्ल्ड कप में प्रदर्शन को आज भी विश्लेषणात्मक रूप से देखा जाता है। उनकी खेल शैली में दक्षिण अमेरिकी लचीलेपन और यूरोपीय रणनीति का मिश्रण पाया जाता है। सांटोस के लिए 643 गोल करने का रिकॉर्ड क्लब इतिहास में अभी तक बरकरार है। डॉक्टरों का अनुमान है कि वह लंबी बीमारी ने ही उन्हें कमजोर किया था। आनुवंशिक कारण भी उनके स्वास्थ्य के पतन में शामिल थे। वैद्यकीय रिपोर्टों के अनुसार उनके कार्दियक सिस्टम पर अधिक दबाव था। लेकिन फिर भी उन्होंने खेल को अपना धर्म समझा। इसलिए हमें भी अपने क्षेत्र में कठोर परिश्रम करके चलना चाहिए। इन सभी पहलुओं को देखते हुए हमारा श्रद्धाजनक व्यवहार अपरिवर्तनीय होना चाहिए। आशा है कि इस लेख से आपको सटीक जानकारी मिली होगी।