मिशन कर्मयोगी: 1.5 करोड़ सरकारी कर्मचारियों को बदलने की तैयारी

अप्रैल 7 Roy Iryan 14 टिप्पणि

सरकारी दफ्तरों में सालों से चली आ रही 'फाइल संस्कृति' और पुराने ढर्रे के नियमों को अब अलविदा कहने का समय आ गया है। भारत सरकार ने अपने सिविल सेवकों की कार्यशैली को पूरी तरह बदलने के लिए एक महा-अभियान शुरू किया है, जिसे मिशन कर्मयोगी (राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम) कहा जा रहा है। 2 सितंबर 2020 को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस योजना का मकसद सरकारी अधिकारियों को केवल 'नियमों का पालन करने वाला' क्लर्क नहीं, बल्कि एक 'कुशल पेशेवर' बनाना है। अब बात सिर्फ डिग्री या अनुभव की नहीं, बल्कि इस बात की है कि एक अधिकारी अपनी भूमिका (Role) को कितनी बारीकी से समझता है।

दिलचस्प बात यह है कि 2026 तक यह मिशन अपने कार्यान्वयन के पांच साल पूरे कर चुका है। यह कोई साधारण ट्रेनिंग कोर्स नहीं है, बल्कि शासन चलाने के तरीके को 'रूल-बेस्ड' (नियम-आधारित) से हटाकर 'रोल-बेस्ड' (भूमिका-आधारित) बनाने की एक कोशिश है। यानी अब अधिकारी को यह पता होगा कि उसकी विशिष्ट जिम्मेदारी क्या है और उस जिम्मेदारी को निभाने के लिए उसे किन कौशलों की जरूरत है। (सोचिए, अगर हर सरकारी कर्मचारी अपनी भूमिका को पूरी स्पष्टता से निभाए, तो आम नागरिक के लिए काम कितने आसान हो जाएंगे!)

क्षमता निर्माण आयोग और ASK मॉडल का जादू

इस पूरे बदलाव की कमान क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission - CBC) के हाथों में है, जिसने अब तीन साल का सफर तय कर लिया है। आयोग का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि पूरे देश में प्रशिक्षण का एक समान स्तर हो और अनुभव साझा करने की संस्कृति विकसित हो।

इस मिशन की जान है इसका 'ASK मॉडल'। यहाँ 'A' का मतलब है एटीट्यूड (व्यवहार), 'S' का मतलब स्किल्स (कौशल) और 'K' का मतलब नॉलेज (ज्ञान)। डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम, जो क्षमता निर्माण आयोग में मानव संसाधन सदस्य हैं, का मानना है कि यह मॉडल सरकारी अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है। अक्सर देखा गया है कि अधिकारियों के पास ज्ञान (Knowledge) तो होता है, लेकिन सही व्यवहार (Attitude) और आधुनिक कौशल (Skills) की कमी के कारण फाइलें अटक जाती हैं। मिशन कर्मयोगी इसी गैप को भरने की कोशिश कर रहा है।

iGOT प्लेटफॉर्म: डिजिटल लर्निंग का नया दौर

सीखने की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाने के लिए 2022 में iGOT कर्मयोगी (Integrated Government Online Training) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। यह एक ऐसा डिजिटल ईकोसिस्टम है जहाँ केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी अपनी ट्रेनिंग ले सकते हैं। अब अधिकारी को ट्रेनिंग के लिए दिल्ली या किसी ट्रेनिंग सेंटर जाने की मजबूरी नहीं है; वह अपने लैपटॉप या मोबाइल पर ही सीख सकता है।

हाल ही में इस प्लेटफॉर्म में 'अमृत ज्ञान कोष' पोर्टल को भी जोड़ा गया है, जो भारत भर की सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं (Best Practices) का एक खजाना है। यह हाइब्रिड लर्निंग मॉडल है, जिसमें डिजिटल कोर्स के साथ-साथ आमने-सामने की चर्चाएं और वर्कशॉप भी शामिल हैं।

कर्मयोगी साधना सप्ताह: तकनीक और परंपरा का संगम

मिशन की गंभीरता को देखते हुए, सरकार ने कर्मयोगी साधना सप्ताह पूरा भारत का आयोजन किया है, जो 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक चलेगा। 'साधना' (SADHANA) का अर्थ है - राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय योग्यता को मजबूत करना।

इस विशेष सप्ताह के दौरान तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान दिया जा रहा है:

  • तकनीक (Technology): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती तकनीकों का शासन में उपयोग।
  • परंपरा (Tradition): भारतीय ज्ञान प्रणालियों और स्वदेशी नवाचारों को प्रशासन से जोड़ना।
  • ठोस परिणाम (Tangible Outcomes): नागरिक-केंद्रित शासन और सेवा वितरण में तेजी लाना।

नियम यह है कि iGOT प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत सभी कर्मचारियों को इस सप्ताह के दौरान कम से कम चार घंटे की अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सामूहिक सीखने का उत्सव जैसा है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

लेकिन क्या यह इतना आसान है? जाहिर है, नहीं। सबसे बड़ी चुनौती है 'स्केल'। लगभग 1.5 करोड़ सरकारी अधिकारियों को ट्रेन करना और उनका मूल्यांकन करना किसी हिमालय चढ़ने जैसा कठिन कार्य है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में केंद्रीकृत ट्रेनिंग मॉडल को लेकर प्रतिरोध देखा जा सकता है।

एक और पेचीदा मामला क्षेत्रीय विविधता का है। जो ट्रेनिंग दिल्ली के अधिकारी के लिए कारगर है, वह लद्दाख के दुर्गम इलाकों या राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों में तैनात अधिकारी के लिए शायद उतनी प्रासंगिक न हो। सरकार को अब इन क्षेत्रीय बारीकियों और केंद्रीय मानकों के बीच संतुलन बनाना होगा।

वैश्विक स्तर पर देखें तो सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने पहले ही डिजिटल ट्रेनिंग मॉडल्स को अपनाया है। मिशन कर्मयोगी के जरिए भारत भी अब इसी राह पर है। यदि यह मिशन सफल होता है, तो 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को पाने में हमारे सिविल सेवक सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। अंततः, यह बदलाव प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मिशन कर्मयोगी वास्तव में क्या है और यह पुराने ट्रेनिंग प्रोग्राम से कैसे अलग है?

मिशन कर्मयोगी एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम है जो सरकारी कर्मचारियों को 'नियम-आधारित' के बजाय 'भूमिका-आधारित' प्रशिक्षण देता है। पुराने प्रोग्राम केवल ज्ञान देने तक सीमित थे, जबकि यह ASK मॉडल (Attitude, Skills, Knowledge) के जरिए व्यवहार और कौशल विकास पर जोर देता है, जिससे अधिकारी अपनी विशिष्ट पोस्ट की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें।

iGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग कौन कर सकता है?

iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का उपयोग केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के सिविल सेवक कर सकते हैं। इसमें स्थायी अधिकारियों के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। यह एक डिजिटल लर्निंग ईकोसिस्टम है जहाँ ऑनलाइन कोर्स, वीडियो और अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।

कर्मयोगी साधना सप्ताह 2026 के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

साधना सप्ताह का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों में AI जैसी आधुनिक तकनीकों, भारतीय पारंपरिक ज्ञान और नागरिक-केंद्रित परिणाम देने की क्षमता को विकसित करना है। इस दौरान अधिकारियों को iGOT प्लेटफॉर्म पर कम से कम 4 घंटे की ट्रेनिंग पूरी करनी होती है ताकि वे शासन के आधुनिक पहलुओं से अपडेट रह सकें।

इस मिशन के लागू होने से आम जनता को क्या फायदा होगा?

जब सरकारी कर्मचारी अधिक कुशल, संवेदनशील और तकनीक-प्रेमी होंगे, तो आम जनता को सेवाओं का लाभ तेजी से मिलेगा। इससे 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में सुधार होगा, भ्रष्टाचार में कमी आएगी और सरकारी दफ्तरों में आम आदमी के काम अधिक पेशेवर तरीके से पूरे होंगे।

Roy Iryan

Roy Iryan (लेखक )

मैं एक अनुभवी पत्रकार हूं जो रोज़मर्रा के समाचारों पर लेखन करता हूं। मेरे लेख भारतीय दैनिक समाचारों पर गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं। मैंने विभिन्न समाचार पत्र और ऑनलाइन प्लेटफार्म के लिए काम किया है। मेरा उद्देश्य पाठकों को सही और सटीक जानकारी प्रदान करना है।

Nikita Roy

Nikita Roy

ये तो बहुत बढ़िया पहल है यार सच में बदलाव आएगा

Anil Kapoor

Anil Kapoor

सिर्फ ट्रेनिंग से कुछ नहीं होने वाला। जब तक सिस्टम की जड़ें सड़ी हुई हैं तब तक ये iGOT और ASK मॉडल सब कागजी बातें हैं। असली समस्या मानसिकता की है जिसे कोई ऑनलाइन कोर्स नहीं बदल सकता। लोग बस सर्टिफिकेट के लिए चार घंटे की ट्रेनिंग पूरी करेंगे और फिर वही पुराने ढर्रे पर लौट आएंगे। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक ये सब सिर्फ एक दिखावा है।

Arun Prasath

Arun Prasath

मिशन कर्मयोगी वास्तव में शासन प्रकिया में एक गुणात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास है। डिजिटल लर्निंग के माध्यम से क्षमता निर्माण को लोकतांत्रिक बनाना एक सराहनीय कदम है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को भी समान अवसर प्राप्त होंगे।

SAURABH PATHAK

SAURABH PATHAK

अरे भाई, मुझे पता है ये सब कैसे काम करता है। असलियत ये है कि आधे से ज्यादा लोग बस लॉग-इन करके वीडियो चला देंगे और सो जाएंगे। क्या सरकार को लगता है कि 1.5 करोड़ लोग सच में अपनी 'एटीट्यूड' बदल लेंगे? नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली बात है यहाँ।

Jivika Mahal

Jivika Mahal

सबको साथ लेकर चलने की यही तो खूबी है इस प्रोगराम की! बस उम्मीद है कि जो छोटे लेवल के कर्मचारी हैं उनके लिए भी ये उतना ही सरल हो जितना बड़े अफसरों के लिए। थोड़े typos हो सकते हैं लेकिन विजन एकदम क्लीयर है

Kartik Shetty

Kartik Shetty

प्रशासनिक दक्षता का यह विमर्श काफी सतही है। वास्तव में राज्य की मशीनरी को समझने के लिए दार्शनिक गहराई की आवश्यकता होती है जिसे किसी हाइब्रिड लर्निंग मॉडल से नहीं सीखा जा सकता

vipul gangwar

vipul gangwar

सबका अपना नजरिया है, पर अगर थोड़े भी लोग बदलेंगे तो आम आदमी का भला होगा। शांति से सोचें तो डिजिटल बदलाव ही एकमात्र रास्ता है आज के समय में।

Sharath Narla

Sharath Narla

वाह! अब सरकारी बाबू 'साधना' करेंगे। मुझे तो लगता है कि फाइलें अभी भी उसी रफ्तार से चलेंगी जिस रफ्तार से कछुआ चलता है, बस अब उनके पास एक डिजिटल सर्टिफिकेट भी होगा यह साबित करने के लिए कि वे 'कुशल' हैं। कितना प्यारा विरोधाभास है!

Pradeep Maurya

Pradeep Maurya

भारतीय प्रशासनिक ढांचे में इस प्रकार के सुधार की अत्यंत आवश्यकता थी क्योंकि हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता और भौगोलिक विस्तार इतना अधिक है कि एक ही प्रकार का प्रशिक्षण सभी के लिए प्रभावी नहीं हो सकता। हमें अपनी परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जो न केवल कुशल हो बल्कि हमारे देश की मिट्टी और उसकी जरूरतों से गहराई से जुड़ा हुआ हो ताकि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके और वह गर्व से कह सके कि शासन उसके साथ है।

Priya Menon

Priya Menon

यह पूरी तरह से अव्यवहारिक है। 1.5 करोड़ लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना और उनसे उम्मीद करना कि वे अपना व्यवहार बदल लेंगे, यह केवल एक काल्पनिक विचार है। प्रशासन में बदलाव ऊपर से नीचे आता है, न कि किसी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से।

megha iyer

megha iyer

यह सब बहुत साधारण सा है। बड़े लोग ही ऐसे बदलाव लाते हैं और हम बस देखते रहते हैं।

Paul Smith

Paul Smith

भइया ये तो बहुत ही जबरदस्त चीज है यार! जब हम अपने पुराने तरीके छोड़कर नयी टेक्नॉलॉजी को अपनाएंगे तभी तो हमारा देश दुनिया में सबसे आगे जाएगा और हम सब मिलकर एक ऐसा भारत बनाएंगे जहाँ सरकारी दफ्तर जाना कोई सजा नहीं बल्कि एक अच्छा अनुभव होगा क्योंकि वहां के लोग आपकी मदद करने के लिए तैयार रहेंगे और AI का इस्तेमाल करके आपका काम मिनटों में कर देंगे जो पहले महीनों में होता था

Santosh Sharma

Santosh Sharma

सही दिशा में कदम है बस इसे ठीक से लागू करना जरूरी है

Anu Taneja

Anu Taneja

धीरे-धीरे सुधार आएगा। बस धैर्य रखने की जरूरत है।

अपनी टिप्पणी टाइप करें